CM Anuprati Coaching Yojana 2026 के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सत्र 2026-27 की विज्ञप्ति जारी कर दी है और ऑनलाइन आवेदन 8 सितंबर 2026 से शुरू हो चुके हैं। इस योजना के तहत राजस्थान के आर्थिक रूप से कमजोर एवं मेधावी विद्यार्थियों को सूचीबद्ध कोचिंग संस्थानों में निःशुल्क कोचिंग दी जाती है, और पात्र होने पर आवास, भोजन व परीक्षा शुल्क के लिए वर्ष में 40,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी मिलती है। कुल 30,000 सीटों के लिए अभ्यर्थी एसएसओ पोर्टल से 7 अक्टूबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन संशोधित दिशा-निर्देश एवं मानक संचालन प्रक्रिया क्रमांक 21178 दिनांक 15 नवंबर 2024 के अनुसार लिए जा रहे हैं, जिसमें पिछले वर्षों की तुलना में कई बड़े बदलाव हुए हैं।
CM Anuprati Coaching Yojana 2026 — एक नज़र में
| योजना | मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना |
| नोडल विभाग | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान |
| सत्र | 2026-27 |
| कुल सीटें | 30,000 (प्रतियोगी 15,000 + प्रवेश परीक्षा 15,000) |
| लाभ | निःशुल्क कोचिंग तथा पात्रता अनुसार ₹40,000 वार्षिक विशेष भत्ता |
| आय सीमा | ₹8 लाख वार्षिक |
| आवेदन तिथि | 8 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 |
| माध्यम | एसएसओ पोर्टल / ई-मित्र (जनाधार के जरिये) |
| चयन | राज्य-स्तरीय मेरिट, कोई प्रवेश परीक्षा नहीं |
कोचिंग संस्थानों की दो श्रेणियाँ — राशि इसी से तय होती है
संशोधित प्रक्रिया में कोचिंग संस्थानों को दो श्रेणियों में बाँटा गया है और यही समझना सबसे पहले ज़रूरी है, क्योंकि आपको मिलने वाली राशि इसी पर निर्भर करती है। पहली श्रेणी है परिणामोन्मुख कोचिंग संस्थान, जिनके लिए टर्नओवर, प्रशिक्षित विद्यार्थियों की संख्या, पूर्णकालिक शिक्षकों की संख्या तथा पिछले तीन वर्षों के परिणाम की कड़ी शर्तें रखी गई हैं। दूसरी श्रेणी है बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं वाले ज्ञानवर्धक अन्य कोचिंग संस्थान, जिनके मापदंड अपेक्षाकृत सरल हैं।
ध्यान रखिए कि यह पुरानी व्यवस्था के “प्रतिष्ठित संस्थान” वाले शब्द का ही नया और अधिक स्पष्ट रूप है। कोई भी संस्थान एक समय में केवल एक ही श्रेणी में आवेदन कर सकता है, और आपकी प्राथमिकता सूची में जो संस्थान आएगा उसकी श्रेणी के हिसाब से ही राशि तय होगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए राशि, अवधि, योग्यता व सीटें
| परीक्षा | राशि | अवधि | न्यूनतम योग्यता | सीटें |
|---|---|---|---|---|
| यूपीएससी सिविल सेवा | परिणामोन्मुख ₹75,000 / ज्ञानवर्धक ₹50,000 | 1 वर्ष | स्नातक या अंतिम दो वर्षों में अध्ययनरत, तथा कक्षा 12 में 60% | 450 |
| आरपीएससी — आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा संयुक्त | परिणामोन्मुख ₹50,000 / ज्ञानवर्धक ₹40,000 | 1 वर्ष | स्नातक या अंतिम दो वर्षों में अध्ययनरत, तथा कक्षा 12 में 60% | 900 |
| आरपीएससी — सब-इंस्पेक्टर तथा पे लेवल-10 व ऊपर की अन्य परीक्षाएँ | ₹20,000 | 6 माह | स्नातक या अंतिम दो वर्षों में अध्ययनरत, तथा कक्षा 12 में 50% | 2,100 |
| रीट | ₹15,000 | 4 माह | बी.एड या एसटीसी, तथा कक्षा 12 में 50% | 2,850 |
| आरएसएसबी — पटवारी, कनिष्ठ सहायक व पे लेवल 5 से ऊपर तथा लेवल 10 से कम की परीक्षाएँ | ₹10,000 | 4 माह | स्नातक में अध्ययनरत या 12वीं के साथ आरएससीआईटी / ओ लेवल / उच्च स्तरीय कंप्यूटर प्रमाण पत्र, तथा कक्षा 12 में 50% | 3,600 |
| कांस्टेबल | ₹10,000 | 4 माह | कक्षा 10 में 50% | 2,400 |
| बैंकिंग / बीमा की विभिन्न परीक्षाएँ | ₹20,000 | 6 माह | यूजीसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक डिग्री में 50% | 900 |
| रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) | ₹20,000 | 6 माह | स्नातक में अध्ययनरत, तथा कक्षा 12 में 50% | 900 |
| यूपीएससी सीडीएस तथा एसएससी | परिणामोन्मुख ₹40,000 / ज्ञानवर्धक ₹25,000 | 1 वर्ष | स्नातक या अंतिम वर्ष में अध्ययनरत, तथा कक्षा 12 में 50% | 900 |
इस सूची में बैंकिंग व बीमा, रेलवे भर्ती बोर्ड तथा सीडीएस व एसएससी की परीक्षाएँ नई जोड़ी गई हैं, जो पहले योजना में शामिल नहीं थीं। इन तीनों को मिलाकर 2,700 सीटें जुड़ी हैं, इसलिए बैंकिंग या रेलवे की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी अब पहली बार इस योजना के दायरे में आए हैं।
प्रवेश परीक्षाओं के लिए राशि, अवधि, योग्यता व सीटें
| परीक्षा | राशि | अवधि | न्यूनतम योग्यता | सीटें |
|---|---|---|---|---|
| इंजीनियरिंग (जेईई) व मेडिकल (नीट) प्रवेश परीक्षा | परिणामोन्मुख ₹70,000 प्रतिवर्ष / ज्ञानवर्धक ₹55,000 प्रतिवर्ष | 2 वर्ष | कक्षा 10 में 50% | 12,000 |
| क्लैट | परिणामोन्मुख ₹40,000 / ज्ञानवर्धक ₹25,000 | 1 वर्ष | कक्षा 10 में 50% | 600 |
| सीएएफसी + सीयूईटी | परिणामोन्मुख ₹40,000 / ज्ञानवर्धक ₹25,000 | 1 वर्ष | कक्षा 10 में 50% | 800 |
| सीएसईईटी + सीयूईटी | परिणामोन्मुख ₹40,000 / ज्ञानवर्धक ₹25,000 | 1 वर्ष | कक्षा 10 में 50% | 800 |
| सीएमएएफसी + सीयूईटी | परिणामोन्मुख ₹40,000 / ज्ञानवर्धक ₹25,000 | 1 वर्ष | कक्षा 10 में 50% | 800 |
यह सबसे बड़ा बदलाव है जिस पर ध्यान देना चाहिए। पहले जेईई और नीट की कोचिंग के लिए दसवीं में 70 प्रतिशत अंकों की शर्त थी, जो अब घटाकर सिर्फ़ 50 प्रतिशत कर दी गई है। इसी तरह क्लैट और वाणिज्य वाले पाठ्यक्रमों में भी 60 प्रतिशत की शर्त हटकर 50 प्रतिशत हो गई है। इसका सीधा अर्थ है कि हज़ारों ऐसे विद्यार्थी अब पात्र हैं जो पिछले वर्षों में सिर्फ़ अंकों की शर्त के कारण बाहर रह जाते थे।
प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक अतिरिक्त शर्त भी है — अभ्यर्थी कक्षा 11वीं या 12वीं में अध्ययनरत हो अथवा 12वीं उत्तीर्ण हो, और दसवीं उत्तीर्ण किए हुए तीन वर्ष से अधिक समय न बीता हो। यह शर्त ड्रॉप ले चुके विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए अपनी दसवीं का वर्ष देखकर ही आवेदन कीजिए।
श्रेणीवार कुल सीटें
| श्रेणी | प्रतियोगी | प्रवेश परीक्षा | कुल |
|---|---|---|---|
| अनुसूचित जाति | 4,350 | 4,350 | 8,700 |
| अनुसूचित जनजाति | 3,150 | 3,150 | 6,300 |
| अन्य पिछड़ा वर्ग | 3,150 | 3,150 | 6,300 |
| आर्थिक पिछड़ा वर्ग | 1,500 | 1,500 | 3,000 |
| अल्पसंख्यक | 1,500 | 1,500 | 3,000 |
| अति पिछड़ा वर्ग | 750 | 750 | 1,500 |
| विशेष योग्यजन | 600 | 600 | 1,200 |
| कुल | 15,000 | 15,000 | 30,000 |
विशेष योग्यजन के लिए 1,200 सीटें अलग से निर्धारित की गई हैं, जो पहले की व्यवस्था में इस रूप में नहीं थीं। संचालन की दृष्टि से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक पिछड़ा वर्ग के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, अल्पसंख्यक वर्ग के लिए अल्पसंख्यक मामलात विभाग तथा विशेष योग्यजन के लिए विशेष योग्यजन निदेशालय जिम्मेदार है। आवेदन सभी के लिए एक ही सिंगल पोर्टल से होता है।
पात्रता — आय की तीन अलग शर्तें
आय की शर्त अब तीन हिस्सों में बँटी है और यही सबसे ज़्यादा भ्रम पैदा करती है, इसलिए अपनी स्थिति के अनुसार सही पंक्ति देखिए।
- माता-पिता राजकीय कार्मिक नहीं हैं — अभ्यर्थी की आय सहित कुल वार्षिक पारिवारिक आय ₹8,00,000 तक
- माता-पिता राज्य सरकार में राजकीय कार्मिक हैं — पे मैट्रिक्स का अधिकतम लेवल-11 तक हो और सकल वेतन व समस्त स्रोतों सहित कुल वार्षिक आय ₹8,00,000 तक
- माता-पिता केन्द्र सरकार में राजकीय कार्मिक हैं — पे मैट्रिक्स का अधिकतम लेवल-6 तक हो और कुल वार्षिक आय ₹8,00,000 तक
इसके अलावा अभ्यर्थी राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, आर्थिक पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग अथवा विशेष योग्यजन श्रेणी का सदस्य होना चाहिए। दो शर्तें ऐसी हैं जिन पर विशेष ध्यान दीजिए — यदि अभ्यर्थी स्वयं केन्द्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम, आयोग, बोर्ड अथवा किसी शासकीय निकाय में नियमित राजकीय कार्मिक है तो वह पात्र नहीं है। और यदि उसने पूर्व में इस निःशुल्क कोचिंग योजना का लाभ लेकर किसी संस्थान में ज्वाइन कर लिया है, तो पोर्टल स्वतः ही उसकी जाँच कर लेगा।
मेरिट कैसे बनती है — बोर्ड के हिसाब से गणना अलग है
यह प्रावधान इस योजना का सबसे निर्णायक और सबसे कम चर्चित हिस्सा है। मेरिट का निर्धारण उसी न्यूनतम योग्यता में प्राप्त अंकों से होता है जो आपकी चुनी हुई परीक्षा के सामने तालिका में दी गई है — किसी के लिए दसवीं के अंक और किसी के लिए बारहवीं के।
असली बात इसके आगे है। दिशा-निर्देशों के अनुसार मेरिट निर्धारण के लिए सीबीएसई तथा अन्य सभी बोर्डों द्वारा प्रदत्त प्रतिशत को 0.9 के गुणांक से गुणा किया जाता है, जबकि आरबीएसई यानी राजस्थान बोर्ड में प्राप्त प्रतिशत को यथावत रखा जाता है। यानी सीबीएसई से 90 प्रतिशत लाने वाले अभ्यर्थी की मेरिट 81 प्रतिशत गिनी जाएगी, और राजस्थान बोर्ड से 85 प्रतिशत लाने वाला उससे ऊपर चला जाएगा। ध्यान दीजिए, पुरानी व्यवस्था में यह गुणांक केवल सीबीएसई पर लगता था, अब यह राजस्थान बोर्ड को छोड़कर सभी बोर्डों पर लागू है।
पात्रता की शर्त और मेरिट की गणना दो अलग चीज़ें हैं। पात्रता के लिए तालिका में दिया न्यूनतम प्रतिशत पूरा करना ज़रूरी है, और उसके बाद चयन इसी गुणांक-सहित गणना से बनी राज्य-स्तरीय मेरिट सूची से होता है। एक और बात — यदि दो अभ्यर्थियों के प्राप्तांक बराबर हों तो अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी।
आवंटन, प्रतीक्षा सूची और ज्वाइनिंग
आवेदन करते समय उस परीक्षा के लिए सूचीबद्ध कोचिंग संस्थानों में से प्रत्येक के लिए प्राथमिकता क्रम भरना अनिवार्य है। संस्थान का आवंटन योग्यता सह वरीयता यानी मेरिट कम प्रिफरेंस के आधार पर होता है। विभाग पहले निर्धारित लक्ष्य के तीन गुना विद्यार्थियों की प्रोविजनल मेरिट सूची जारी करता है। इसके बाद मूल निवास वाले जिले के विभागीय जिलाधिकारी दस्तावेज़ों की जाँच कर 10 दिवस में सत्यापन व अनुमोदन करते हैं, तब जाकर श्रेणीवार मुख्य मेरिट सूची निकलती है और शेष अभ्यर्थी प्रतीक्षा सूची में रखे जाते हैं।
मुख्य सूची में आए अभ्यर्थियों को 10 दिवस के भीतर कोचिंग संस्थान में ज्वाइन करने का अवसर मिलता है। इस अवधि में ज्वाइन न करने पर वह सीट प्रतीक्षा सूची के पात्र अभ्यर्थी को दे दी जाती है। ज्वाइनिंग आधार आधारित बायोमेट्रिक अथवा ओटीपी से होती है, और एक बार ज्वाइन कर लेने के बाद आगामी सत्रों में दोबारा आवेदन कर योजना का लाभ नहीं मिलेगा — पोर्टल पर इसका स्वतः चिन्हीकरण होता है। दो वर्षीय पाठ्यक्रमों में मेरिट एक ही बार जारी होती है, द्वितीय वर्ष के लिए अलग मेरिट नहीं निकलती।
दस्तावेज़ — क्या अपलोड करना है और क्या नहीं
जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र तथा दसवीं व बारहवीं की अंकतालिका जैसे दस्तावेज़ अपलोड नहीं कराए जाते — ये वेब सर्विस के माध्यम से जनाधार, राज ई-वॉल्ट तथा डिजीलॉकर के डेटाबेस से स्वतः सत्यापित हो जाते हैं। इसलिए आवेदन से पहले आपका असली काम यह सुनिश्चित करना है कि जनाधार में आपका जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र अद्यतन एवं सत्यापित हो। यदि अंकतालिका स्वतः सत्यापित न हो पाए, तो उसे अपलोड करने का विकल्प पोर्टल पर रहेगा।
फिर भी तीन चीज़ें अपलोड करनी ही होंगी। पहली, परीक्षावार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेज़ तथा अंतिम उत्तीर्ण परीक्षा की अंकतालिका। दूसरी, बैंक पासबुक — क्योंकि विशेष भत्ता स्वयं विद्यार्थी के सक्रिय बैंक खाते अथवा माता-पिता के साथ संयुक्त खाते में डीबीटी से आता है, और खाते के विवरण में त्रुटि होने पर जिम्मेदारी विद्यार्थी की ही होगी। तीसरी, आय संबंधी प्रमाण — यदि माता-पिता राजकीय कार्मिक हैं तो आहरण एवं संवितरण अधिकारी या कार्यालयाध्यक्ष द्वारा जारी गत वर्ष का वार्षिक आय प्रमाण पत्र, और यदि नहीं हैं तो गत वर्ष की आयकर विवरणिका की प्रमाणित प्रति। आईटीआर न भरने की स्थिति में नोटरी तथा दो राजपत्रित अधिकारियों से प्रमाणित आय घोषणा पत्र अपलोड करना होगा।
₹40,000 का विशेष भत्ता — शर्तें ध्यान से पढ़ें
कोचिंग फीस के अतिरिक्त आवास, भोजन तथा परीक्षा शुल्क के लिए वर्ष में 40,000 रुपये की सहायता दी जाती है, लेकिन यह सभी को नहीं मिलती।
- यह भत्ता केवल यूपीएससी सिविल सेवा, आरपीएससी की आरएएस व अधीनस्थ सेवा, मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश, सीए, सीएस व सीएम प्रवेश तथा सीडीएस व एसएससी की कोचिंग करने वालों को देय है
- अभ्यर्थी को कोचिंग के लिए अपना आवास छोड़कर किसी अन्य शहर में आकर किराये पर रहना पड़ा हो
- कोचिंग संस्थान को किरायानामा अथवा छात्रावास शुल्क रसीद प्रस्तुत करनी होगी, जिसे संस्थान पोर्टल के Hostel Allowance विकल्प में अपलोड करेगा
- राशि त्रैमासिक आधार पर बाँटकर विभागीय जिलाधिकारी द्वारा भुगतान की जाती है
- विभागीय छात्रावास में रहने वाले अभ्यर्थियों को यह राशि देय नहीं है
पिछली व्यवस्था से यहाँ दो बड़े बदलाव हुए हैं — अब यह भत्ता दोनों श्रेणियों के संस्थानों से कोचिंग लेने वालों को मिलता है, केवल प्रतिष्ठित संस्थान वालों तक सीमित नहीं है, और इसमें परीक्षा शुल्क भी जोड़ दिया गया है।
📊 विश्लेषण — इस बार की व्यवस्था में क्या बदला और उसका क्या मतलब है
सत्र 2024-25 से लागू संशोधित प्रक्रिया ने योजना का ढाँचा काफ़ी बदल दिया है, और इन बदलावों को समझे बिना आवेदन का निर्णय अधूरा रहेगा।
पहला बदलाव — प्रवेश परीक्षाओं की अंक शर्त गिरी है। जेईई और नीट की कोचिंग के लिए दसवीं में 70 प्रतिशत की शर्त घटकर 50 प्रतिशत हो गई है, और इन दोनों के लिए 12,000 सीटें हैं जो कुल का 40 प्रतिशत है। यह इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है और अब सबसे सुलभ भी। जो विद्यार्थी पहले अंकों के कारण आवेदन नहीं कर पाते थे, उन्हें इस बार ज़रूर प्रयास करना चाहिए। साथ ही सावधानी यह है कि शर्त गिरने से आवेदन भी बढ़ेंगे, इसलिए मेरिट का स्तर पिछले वर्षों से भिन्न रह सकता है।
दूसरा बदलाव — लक्ष्य अब जिलेवार नहीं, राज्य-स्तरीय हैं। पहले सीटें जिलेवार बँटी होती थीं, जिससे कम आवेदन वाले जिलों के अभ्यर्थियों को अपेक्षाकृत आसानी रहती थी। अब मेरिट राज्य-स्तरीय बनती है, यानी आपकी प्रतिस्पर्धा पूरे राजस्थान से है। छोटे जिलों के अभ्यर्थियों के लिए यह बदलाव प्रतिकूल है और उन्हें अंकों के हिसाब से अपनी संभावना अधिक सावधानी से आँकनी चाहिए।
तीसरा बदलाव — नई परीक्षाएँ जुड़ी हैं। बैंकिंग व बीमा, रेलवे भर्ती बोर्ड तथा सीडीएस व एसएससी अब योजना में शामिल हैं और इनके लिए 2,700 सीटें हैं। चूँकि ये पहली बार शामिल हुई हैं, इनके बारे में जागरूकता कम है और आवेदन अपेक्षाकृत कम आने की संभावना बनती है। बैंकिंग या रेलवे की तैयारी करने वालों के लिए यह अवसर ध्यान देने लायक है।
चौथा बदलाव — संस्थानों पर जवाबदेही बढ़ी है। कोचिंग संस्थानों को भुगतान अब तीन किश्तों में होता है — ज्वाइनिंग के बाद 30 दिवस की नियमित उपस्थिति पर 60 प्रतिशत, पाठ्यक्रम पूर्ण होने पर 35 प्रतिशत, और शेष 5 प्रतिशत तभी जब संस्थान परिणाम आधारित मापदंड पूरा करे। यूपीएससी और आरएएस के लिए यह मापदंड 2 प्रतिशत, अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं तथा नीट व जेईई के लिए 5 प्रतिशत और क्लैट, वाणिज्य पाठ्यक्रमों व बैंकिंग के लिए 8 प्रतिशत है। विद्यार्थी के लिए इसका अर्थ यह है कि संस्थान अब परिणाम देने के लिए बाध्य है, क्योंकि उसकी अंतिम किश्त और आगामी नवीनीकरण दोनों इसी पर टिके हैं।
पाँचवाँ बदलाव — उपस्थिति की शर्त सख़्त हुई है। हर 30 दिवस की अवधि में कम से कम 05 दिवस की सकारात्मक बायोमेट्रिक उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज होना अनिवार्य है, तभी किश्त प्रोसेस होगी। और यदि अभ्यर्थी कोचिंग बीच में छोड़ देता है तो संस्थान को आगे की किश्तों का भुगतान नहीं होगा। पुरानी व्यवस्था में इसे “राशि वसूली योग्य” कहा गया था, अब इसे सीधे भुगतान रोकने के रूप में लिखा गया है।
🎯 आवेदन रणनीति — चयन की संभावना कैसे बढ़ाएँ
सबसे पहले जनाधार दुरुस्त कीजिए, फॉर्म बाद में भरिए। चूँकि जाति और मूल निवास का सत्यापन जनाधार से स्वतः होता है, यदि वहाँ प्रविष्टि पुरानी या असत्यापित है तो आवेदन अटक जाएगा। यह एक काम आवेदन खुलने के पहले सप्ताह में ही निपटा लीजिए, क्योंकि जनाधार में संशोधन में समय लगता है और खिड़की केवल एक महीने की है।
दूसरा, प्राथमिकता क्रम सोच-समझकर भरिए। आवंटन मेरिट कम प्रिफरेंस से होता है, इसलिए सूची में केवल सबसे लोकप्रिय संस्थान भरना नुकसानदेह है। अपनी मेरिट का अनुमान लगाकर ऊपर दो-तीन बड़े संस्थान रखिए और उसके बाद अपने शहर या नज़दीकी शहर के सूचीबद्ध संस्थान भी अवश्य जोड़िए। यह भी देखिए कि जो संस्थान आप चुन रहे हैं वह परिणामोन्मुख श्रेणी में है या ज्ञानवर्धक, क्योंकि आपकी कोचिंग राशि इसी से तय होगी।
तीसरा, आय प्रमाण की सही श्रेणी पहचानिए। यदि माता-पिता राजकीय कार्मिक हैं तो आपको आईटीआर नहीं, बल्कि आहरण एवं संवितरण अधिकारी का जारी किया वार्षिक आय प्रमाण पत्र चाहिए, जिसमें पद, वेतनमान, मूल वेतन, सकल वेतन और पे-लेवल अंकित हो। इसे बनवाने में समय लगता है, इसलिए आज ही आवेदन कर दीजिए। राज्य कार्मिकों के लिए लेवल-11 और केन्द्रीय कार्मिकों के लिए लेवल-6 की सीमा भी पहले जाँच लीजिए।
चौथा, बैंक खाते का विवरण दो बार जाँचिए। विशेष भत्ता डीबीटी से आता है और खाते के विवरण में कोई त्रुटि या विसंगति होने पर पूरी जिम्मेदारी विद्यार्थी की है। खाता सक्रिय होना चाहिए और पासबुक की स्पष्ट प्रति अपलोड होनी चाहिए।
पाँचवाँ, मेरिट सूची आने के बाद 10 दिवस की समय-सीमा मत भूलिए। मुख्य सूची में नाम आने पर इस अवधि में ज्वाइन न करने पर सीट प्रतीक्षा सूची वाले को चली जाती है और दोबारा अवसर नहीं मिलता। आवेदन के बाद पोर्टल पर स्थिति नियमित देखते रहिए।
अंत में — आवेदन कर देने के बाद तैयारी रोकिए मत। प्रोविजनल सूची, जिलाधिकारी का दस-दिवसीय सत्यापन और मुख्य सूची — इन तीनों चरणों में कई सप्ताह लगते हैं। यह समय स्वयं पढ़ाई में लगाया जाए तो कोचिंग शुरू होते ही आप बाकी विद्यार्थियों से आगे रहेंगे।
आवेदन कैसे करें
- जनाधार में जाति एवं मूल निवास प्रमाण पत्र की प्रविष्टि अद्यतन व सत्यापित करवा लें
- एसएसओ पोर्टल पर अपनी एसएसओ आईडी से लॉगिन करें या ई-मित्र पर जाएँ
- CM Anuprati Coaching आइकन पर क्लिक करें
- CM Anuprati Coaching Scheme चुनकर ड्रॉपडाउन में Student विकल्प पर जाएँ
- जनाधार के जरिये आवेदन आरंभ करें — सत्यापित डेटा स्वतः आ जाएगा
- परीक्षा चुनें और सूचीबद्ध संस्थानों का प्राथमिकता क्रम भरें
- शैक्षणिक योग्यता दस्तावेज़, बैंक पासबुक तथा आय प्रमाण अपलोड करें
- स्व-घोषणा का कॉलम मार्क करें, अन्यथा आवेदन सबमिट नहीं होगा
- फॉर्म जाँचकर सबमिट करें और प्रिंट सुरक्षित रखें
महत्वपूर्ण लिंक
| ऑनलाइन आवेदन | एसएसओ पोर्टल पर जाएँ |
| विभागीय वेबसाइट एवं दिशा-निर्देश | sje.rajasthan.gov.in |
अन्य योजनाओं एवं भर्तियों के लिए देखें — नवीनतम सरकारी भर्तियाँ, सरकारी योजनाएँ तथा निःशुल्क क्विज़ हब।
स्रोत: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान — मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के संशोधित नवीनतम विस्तृत दिशा-निर्देश एवं मानक संचालन प्रक्रिया, क्रमांक 21178 दिनांक 15.11.2024 तथा सत्र 2026-27 की विज्ञप्ति | अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
अनुप्रति कोचिंग योजना 2026-27 में आवेदन कब तक हैं?
8 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक, एसएसओ पोर्टल या ई-मित्र से।
JEE और NEET की कोचिंग के लिए कितने अंक चाहिए?
दसवीं में केवल 50 प्रतिशत, और दसवीं उत्तीर्ण किए तीन वर्ष से अधिक न बीते हों।
क्या CBSE और RBSE के अंक मेरिट में बराबर गिने जाते हैं?
नहीं। सीबीएसई सहित सभी बोर्डों के प्रतिशत को 0.9 के गुणांक से गुणा किया जाता है, केवल आरबीएसई के अंक यथावत रहते हैं।
क्या सरकारी कर्मचारी के बच्चे पात्र हैं?
हाँ। राज्य कार्मिक के लिए पे मैट्रिक्स लेवल-11 तक और केन्द्रीय कार्मिक के लिए लेवल-6 तक, साथ में कुल वार्षिक आय ₹8 लाख तक।
₹40,000 का भत्ता किसे मिलता है?
UPSC, RAS, मेडिकल/इंजीनियरिंग, CA/CS/CM तथा CDS/SSC की कोचिंग करने वालों को, जिन्हें अपना शहर छोड़कर किराये पर रहना पड़े। विभागीय छात्रावास वालों को देय नहीं।